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Sandeep dabral 'sendy'
miraa hi ahbaab miraa qaateel niklaa
miraa hi ahbaab miraa qaateel niklaa | मेरा ही अहबाब मिरा क़ातिल निकला
- Sandeep dabral 'sendy'
मेरा
ही
अहबाब
मिरा
क़ातिल
निकला
सो
ग़र्क़ी
में
हाथ
मिरा
शामिल
निकला
रोज़
मिसालें
देता
जिसकी
बातों
की
दुनिया
में
वो
ही
ज़्यादा
बातिल
निकला
- Sandeep dabral 'sendy'
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मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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इतने
ही
आतुर
थे
अगर
झलक
भर
के
आँख
बिछानी
थी
सो
आँख
बिछा
लेते
कैसे
'आशिक़
हो
जो
आए
ख़ाली
हाथ
नज़र
न
मिल
पाई
तो
हाथ
मिला
लेते
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Sandeep dabral 'sendy'
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लिखना
होगा
मुझको
जब
भी
दंगों
पर
मैं
लिक्खूँगा
सत्ता
के
भिखमंगों
पर
हो
सरहद
पर
जब
भी
रिपु
से
जंग
यहाँ
मैं
भेजूँ
नेताओं
को
भी
जंगों
पर
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Sandeep dabral 'sendy'
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ये
न
सोचो
कि
मुझको
ख़बर
है
नहीं
सठ
की
मुफलिसों
पर
नज़र
है
नहीं
हाल
ख़स्ता
हमारा
यहाँ
देखिए
गाँव
मेरा
बड़ा
सा
शहर
है
नहीं
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Sandeep dabral 'sendy'
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नामुमकिन
जैसा
तो
कुछ
भी
नहीं
है
दुनिया
में
पत्थर
को
भी
काटा
जा
सकता
है
पानी
से
Sandeep dabral 'sendy'
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याँ
जिस
के
इंतज़ार
में
ज़ाया'
की
अपनी
सारी
उम्र
उसने
ही
मुझको
याद
के
यहाँ
क़ाबिल
तक
नइँ
समझा
Sandeep dabral 'sendy'
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