hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Sandeep dabral 'sendy'
likhna hogaa mujhko jab bhi dangoon par
likhna hogaa mujhko jab bhi dangoon par | लिखना होगा मुझको जब भी दंगों पर
- Sandeep dabral 'sendy'
लिखना
होगा
मुझको
जब
भी
दंगों
पर
मैं
लिक्खूँगा
सत्ता
के
भिखमंगों
पर
हो
सरहद
पर
जब
भी
रिपु
से
जंग
यहाँ
मैं
भेजूँ
नेताओं
को
भी
जंगों
पर
- Sandeep dabral 'sendy'
Download Sher Image
जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
Read Full
Ankit Maurya
Send
Download Image
37 Likes
हो
रही
थी
जंग
उसके
नाम
पर
और
वो
ही
मेरे
दुश्मनों
के
काम
आया
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
2 Likes
हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
63 Likes
कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
Send
Download Image
44 Likes
हर
दिन
ही
मोहब्बत
को
पाने
की
लड़ाई
में
जो
हार
नहीं
सकता
वो
जीत
नहीं
सकता
Hasan Raqim
Send
Download Image
5 Likes
देश
मेरा
जंग
तो
जीता
मगर
लौट
कर
आया
नहीं
बेटा
मेरा
Divy Kamaldhwaj
Send
Download Image
40 Likes
बात
की
फिर
बाद
में
झगड़ा
हुआ
और
उस
के
बाद
मन
हल्का
हुआ
Meem Alif Shaz
Send
Download Image
0 Likes
मुरली
छूटी
शंख
बजा
रास
तजा
फिर
युद्ध
सजा
क्या
पीछे
क्या
आगे
है
सब
कुछ
राधे
राधे
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
114 Likes
उरूज
पर
है
अज़ीज़ो
फ़साद
का
सूरज
जभी
तो
सूखती
जाती
हैं
प्यार
की
झीलें
Nami Nadri
Send
Download Image
18 Likes
जंग
में
जिन्हे
अब
तक
तुम
झुका
न
पाए
थे
झुक
रही
हैं
वो
सारी
पगड़ियाँ
मोहब्बत
में
Alankrat Srivastava
Send
Download Image
7 Likes
Read More
जो
नादानी
में
हो
वो
ही
मुहब्बत
है
समझदारी
में
तो
बस
सौदे
होते
हैं
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
कि
लिया
है
जब
से
मैंने
उसकी
पेशानी
पर
बोसा
फीकी
लगती
अब
बज़्में
फीके
लगते
हैं
ये
नज़ारे
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
1 Like
देखना
है
गाँव
गर
तो
आँख
भर
के
देख
लो
गाँव
के
घरों
को
एक
दिन
ठहर
के
देख
लो
शहर
के
नज़ारे
सब
के
सब
दिखेंगे
फीके,
बस
इक
दफ़ा
नज़ारे
गाँव
में
सहर
के
देख
लो
Read Full
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
मैं
मसाइब
से
यहाँ
अब
हार
कैसे
मान
लूँ
यार
जीत
की
ख़ातिर
रखे
हैं
गिरवी
ज़ेवर
माँ
ने
अपने
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
अनोखी
कश्मकश
में
हूँ,
कि
क्यूँ
ये
चश्म
नम
है
न
जीने
की
ख़ुशी
है
याँ
न
मरने
का
ही
ग़म
है
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Khwaahish Shayari
Bekhudi Shayari
Kanta Shayari
Wajood Shayari
Mahatma Gandhi Shayari