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Sandeep dabral 'sendy'
ham jisko socha karte the har din raat miyaan lekin
ham jisko socha karte the har din raat miyaan lekin | हम जिसको सोचा करते थे हर दिन रात मियाँ लेकिन
- Sandeep dabral 'sendy'
हम
जिसको
सोचा
करते
थे
हर
दिन
रात
मियाँ
लेकिन
वो
तो
किसी
और
के
ही
ख़्वाबों
की
ही
शहजादी
निकली
- Sandeep dabral 'sendy'
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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चूँकि
रोना
बहाल
रहता
है
ख़ुश्क
आँखों
का
हाल
रहता
है
नींद
आँखों
से
क्यूँँ
गुरेज़ा
है
रात
भर
ये
सवाल
रहता
है
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Sumit Panchal
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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जागना
और
जगा
के
सो
जाना
रात
को
दिन
बना
के
सो
जाना
Ali Zaryoun
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खुलती
है
मेरी
नींद
हर
इक
रात
दो
बजे
इक
रात
दो
बजे
मुझे
छोड़ा
था
आपने
Tanoj Dadhich
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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कि
अदाओं
पर
तेरी
मैं
एक
किताब
लिखूँगा
तेरी
इन
आँखों
को
अंगूरी
शराब
लिखूँगा
Sandeep dabral 'sendy'
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पेशे
से
कोई
अच्छा-ख़ासा
चित्रकार
तो
नइँ
हूँ
मैं
याँ
लेकिन
विश्वास
कीजिएगा
मुझ
सेे
बेहतर
तस्वीर
नइँ
बनाएगा
कोई
Sandeep dabral 'sendy'
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मिटा
देगी
ये
लौ
अब
हस्ती
उसकी
भाँप
जाता
है
अँधेरा
नाम
सुनकर
यूँँ
ही
थर-थर
काँप
जाता
है
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त
कहाँ
लगता
है
याँ
क्या
से
क्या
होने
में
जैसे
नइँ
लगता
है
याँ,
'है'
से
'था'
होने
में
Sandeep dabral 'sendy'
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बीज
नफ़रत
के
ज़मीं
पर
बो
दिए
हैं
लोगों
ने
सो
अब
मोहब्बत
के
लिए
मैं
आसमाँ
को
ढूँढता
हूँ
Sandeep dabral 'sendy'
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