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Sandeep dabral 'sendy'
ki adaaon par teri main ek kitaab likhoonga
ki adaaon par teri main ek kitaab likhoonga | कि अदाओं पर तेरी मैं एक किताब लिखूँगा
- Sandeep dabral 'sendy'
कि
अदाओं
पर
तेरी
मैं
एक
किताब
लिखूँगा
तेरी
इन
आँखों
को
अंगूरी
शराब
लिखूँगा
- Sandeep dabral 'sendy'
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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तुम्हारी
आँखों
की
तौहीन
है
ज़रा
सोचो
तुम्हारा
चाहने
वाला
शराब
पीता
है
Munawwar Rana
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ऐ
शैख़
तू
शराब
के
पीछे
न
पड़
कभी
ये
ख़ुद
को
वाहियात
बनाने
की
चीज़
है
Shivsagar Sahar
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जिस
फ़िल्म
का
हीरो
मुझे
होना
था
ऐ
पपलू
उस
फिल्म
के
दो
दिन
से
टिकट
बेच
रहा
हूँ
हर
काम
पुलिस
वालों
की
मर्ज़ी
से
करूँँगा
दारू
भी
मैं
थाने
के
निकट
बेच
रहा
हूँ
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Paplu Lucknawi
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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गरचे
अहल-ए-शराब
हैं
हम
लोग
ये
न
समझो
ख़राब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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इस-क़दर
खा
बैठी
तन्हाई
जवानी
याँ
हमारी
सिर्फ़
दो
मिसरों
में
ही
सिमटी
कहानी
याँ
हमारी
Sandeep dabral 'sendy'
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रुख़सार,
जबीं
हर
बार
नज़र
खींचे
अपनी
ओर
मैं
तिल
को
नुक्ता
बिंदी
को
महताब
लिखूँगा
Sandeep dabral 'sendy'
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याद
तो
उनको
किया
जाता
है
जिनको
याँ
बिसरा
दिया
जाता
है
होता
है
बैर
भला
साँसों
से
संग
उनके
तो
जिया
जाता
है
जीत
पक्की
यहाँ
हो
जाती
है
मन
से
गर
मान
लिया
जाता
है
याँ
हैं
कुछ
ऐसे,
सहारे
जिनके
दो
घड़ी
और
जिया
जाता
है
हर
किसी
को
दिखा
सकते
नइँ
सो
गिरते
अश्कों
को
पिया
जाता
है
रौशनी
हर-सू
छा
जाती
है
बस
तम
में
जब
एक
दिया
जाता
है
रूह
दाइम
यहाँ
ज़ख़्मी
रहती
जिस्म
का
ज़ख़्म
सिया
जाता
है
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Sandeep dabral 'sendy'
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चराग़
वो
वफ़ा
के
सब
बुझा
उदास
कर
गई
ख़ुशी
को
साथ
लेके
ग़म
हज़ार
पास
कर
गई
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त
को
भी
लिक्खेंगे
हम
हिसाब
से
अपने
हिज्र
के
दिनों
को
हम
सालों
साल
लिक्खेंगे
Sandeep dabral 'sendy'
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