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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
hak jataati rah gaii duniya shafaq
hak jataati rah gaii duniya shafaq | हक जताती रह गई दुनिया "शफ़क़"
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
हक
जताती
रह
गई
दुनिया
"शफ़क़"
चूमकर
वो
तुझको
जूठा
कर
गई
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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ज़मीं
सर
पे
उठा
लूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
गगन
को
भी
कुचल
दूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
भला
औक़ात
क्या
इस
चाँद
की
उस
चाँद
के
आगे
हज़ारों
चाँद
वारूँगा
उस
इक
लड़की
की
ख़ातिर
मैं
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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जो
ज़र,
फल
न
दे
पाए
वो
छांव
देंगे
न
काटो
दरख़्तों
को
आँगन
से
लोगों
वसीयत
को
रखते
हो
जैसे
सँभाले
सँभालो
दरख़्तों
को
भी
वैसे
लोगों
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अब
ज़रूरी
है
नहीं
मुझको
वसाइल
कोई
उसकी
यादों
के
सहारे
ही
जी
लूँगा
कुछ
दिन
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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हुस्न
पर
ग़ुरूर
होना
लाज़मी
तो
है
मगर
हुस्न
ढलता
भी
है
और
ग़ुरूर
टूटता
भी
है
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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बेटे
जो
भेजे
हैं
सरहद
से
बुला
लो
साहब
कोख
माँओं
की
उजड़ने
से
बचा
लो
साहब
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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