ek ansuljhi paheli ban gaii hai zindagi | एक अनसुलझी पहेली बन गई है ज़िंदगी

  - Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
एकअनसुलझीपहेलीबनगईहैज़िंदगी
आजमुश्किलहैतोकलआसाँ,यहीहैज़िंदगी
ज़िंदगीजिसकीनहींहैकोईकीमतदुनियामें
अस्पतालोंमेंबड़ीसस्तीवहीहैज़िंदगी
मखमलीबिस्तरपेसोकरहैगुज़ारीउम्रभर
जोसड़कपरआजलावारिसपड़ीहैज़िंदगी
देखलोचाहेहज़ारोंबारकरकेकोशिशें
हरदफ़ाहीमौतकेआगेझुकीहैज़िंदगी
अच्छाहोताहममोहब्बतहीकरतेआपसे
आपसेकरकेमोहब्बतरोरहीहैज़िंदगी
नामइसकेहैंज़रूरतकेमुताबिक़औरकई
रोटी,कपड़ा,घर,गुज़ारा,नौकरीहैज़िंदगी
फ़र्कहोताहैसमझका,बातकोसमझो'शफ़क़'
सिर्फ़अनसुलझीनहींहै,अनकहीहैज़िंदगी
  - Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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