apne haseen rukh se hata kar naqaab ko | अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब को

  - SALIM RAZA REWA
अपनेहसीनरुख़सेहटाकरनक़ाबको
शर्मिंदाकररहाहैकोईमाहताबको
उनकीनिगाह-ए-नाज़नेमदहोशकरदिया
मैंनेछुआनहींहैक़समसेशराबको
दिलचाहताहैउसकोदु'आसेनवाज़दूँ
जबदेखताहूँमैंकिसीखिलतेगुलाबको
येज़िन्दगीतिलिस्मकेजैसीहैदोस्तो
क्यादेखतेनहींहोबिखरतेहुबाबको
इंसानबनगयाहै'रज़ा'आदमीसेवो
दिलसेपढ़ाहैजिसनेख़ुदाकीकिताबको
  - SALIM RAZA REWA
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