कभी तो ख़ुद में ही ढलने को जंग करता हूँ

  - SALIM RAZA REWA
कभीतोख़ुदमेंहीढलनेकोजंगकरताहूँ
कभीमैंख़ुदकोबदलनेकोजंगकरताहूँ
दिल-ओ-दिमाग़कीआपसमेंजबनहींबनती
तोइनकेसाथमैंचलनेकोजंगकरताहूँ
मेराग़ुरूरमेरेरास्तेमेंजबआए
तोउसकीहस्तीकुचलनेकोजंगकरताहूँ
ग़मोंकीभीड़नेघेराहैचारोंजानिबसे
मैंगिररहाहूँसँभलनेकोजंगकरताहूँ
जफ़ा-ए-वक़्तनेपैरोंकोबाँधरक्खाहै
वफ़ाकेसाथमैंचलनेकोजंगकरताहूँ
कुरेदतीहैतेरीयादमेरेज़ख़्मोंको
मैंइसकीज़दसेनिकलनेकोजंगकरताहूँ
  - SALIM RAZA REWA
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