apne har gham ko vo ashkon men piro letii hai | अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है

  - SALIM RAZA REWA
अपनेहरग़मकोवोअश्कोंमेंपिरोलेतीहै
बेटीमुफ़लिसकीखुलेघरमेंभीसोलेतीहै
तबमुझेदर्दकाएहसासबहुतहोताहै
जबमेरीलख़्त-ए-जिगरआँखभिगोलेतीहै
मैंअकेलानहींरोताहूँशब-ए-हिज्राँमें
मेरीतन्हाईमेरेसाथमेंरोलेतीहै
अपनेदुखदर्दकोमैलानहींहोनेदेती
अपनीआँखोंसेवोहरदर्दकोधोलेतीहै
जबभीख़ुशहोकेनिकलताहूँ‘रज़ा’मैंघरसे
मेरीमायूसीमेरेसाथमेंहोलेतीहै
  - SALIM RAZA REWA
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