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Sahir Ludhianvi
ye zulf agar khul ke bikhar jaa.e to achha
ye zulf agar khul ke bikhar jaa.e to achha | ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
- Sahir Ludhianvi
ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तिरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
दुनिया
की
निगाहों
में
भला
क्या
है
बुरा
क्या
ये
बोझ
अगर
दिल
से
उतर
जाए
तो
अच्छा
वैसे
तो
तुम्हीं
ने
मुझे
बर्बाद
किया
है
इल्ज़ाम
किसी
और
के
सर
जाए
तो
अच्छा
- Sahir Ludhianvi
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वहम
होता
है
कि
छूने
से
सँवर
जाएँगी
सोचता
हूँ
जो
मुक़द्दर
मिरा
ज़ुल्फ़ें
तेरी
Neeraj Neer
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जब
यार
ने
उठा
कर
ज़ुल्फ़ों
के
बाल
बाँधे
तब
मैं
ने
अपने
दिल
में
लाखों
ख़याल
बाँधे
Mohammad Rafi Sauda
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उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
Shaad Imran
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शा'इरी
तो
ले
गए
जौन
एलिया
ही
अपने
साथ
शायरों
में
लंबे
लंबे
बाल
वाले
रह
गए
Khalid Irfan
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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क्यूँ
परेशाँ
हो
अब
सवालों
पे
धूल
तो
आ
गई
है
बालों
पे
हैं
रकीबों
के
तोहफ़े
साहब
दाँतों
के
सब
निशान
गालों
पे
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A R Sahil "Aleeg"
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मुँह
पर
नक़ाब-ए-ज़र्द
हर
इक
ज़ुल्फ़
पर
गुलाल
होली
की
शाम
ही
तो
सहर
है
बसंत
की
Lala Madhav Ram Jauhar
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पलक
का
बाल
गिरे
कब
मैं
कब
तुझे
माँगूँ
मैं
कशमकश
में
ये
पलकें
न
नोच
लूँ
अपनी
Vishnu virat
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कुछ
इस
के
सँवर
जाने
की
तदबीर
नहीं
है
दुनिया
है
तिरी
ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर
नहीं
है
Hafeez Banarasi
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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माना
कि
इस
ज़मीं
को
न
गुलज़ार
कर
सके
कुछ
ख़ार
कम
तो
कर
गए
गुज़रे
जिधर
से
हम
Sahir Ludhianvi
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इतनी
हसीन
इतनी
जवाँ
रात
क्या
करें
जागे
हैं
कुछ
अजीब
से
जज़्बात
क्या
करें
पेड़ों
के
बाज़ुओं
में
महकती
है
चाँदनी
बेचैन
हो
रहे
हैं
ख़यालात
क्या
करें
साँसों
में
घुल
रही
है
किसी
साँस
की
महक
दामन
को
छू
रहा
है
कोई
हात
क्या
करें
शायद
तुम्हारे
आने
से
ये
भेद
खुल
सके
हैरान
हैं
कि
आज
नई
बात
क्या
करें
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Sahir Ludhianvi
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तुम
अपना
रंज-ओ-ग़म
अपनी
परेशानी
मुझे
दे
दो
तुम्हें
ग़म
की
क़सम
इस
दिल
की
वीरानी
मुझे
दे
दो
ये
माना
मैं
किसी
क़ाबिल
नहीं
हूँ
इन
निगाहों
में
बुरा
क्या
है
अगर
ये
दुख
ये
हैरानी
मुझे
दे
दो
मैं
देखूँ
तो
सही
दुनिया
तुम्हें
कैसे
सताती
है
कोई
दिन
के
लिए
अपनी
निगहबानी
मुझे
दे
दो
वो
दिल
जो
मैं
ने
माँगा
था
मगर
ग़ैरों
ने
पाया
है
बड़ी
शय
है
अगर
उस
की
पशेमानी
मुझे
दे
दो
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Sahir Ludhianvi
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भूले
से
मोहब्बत
कर
बैठा,
नादाँ
था
बेचारा,
दिल
ही
तो
है
हर
दिल
से
ख़ता
हो
जाती
है,
बिगड़ो
न
ख़ुदारा,
दिल
ही
तो
है
इस
तरह
निगाहें
मत
फेरो,
ऐसा
न
हो
धड़कन
रुक
जाए
सीने
में
कोई
पत्थर
तो
नहीं
एहसास
का
मारा,
दिल
ही
तो
है
जज़्बात
भी
हिन्दू
होते
हैं
चाहत
भी
मुसलमाँ
होती
है
दुनिया
का
इशारा
था
लेकिन
समझा
न
इशारा,
दिल
ही
तो
है
बेदाद-गरों
की
ठोकर
से
सब
ख़्वाब
सुहाने
चूर
हुए
अब
दिल
का
सहारा
ग़म
ही
तो
है
अब
ग़म
का
सहारा
दिल
ही
तो
है
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Sahir Ludhianvi
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