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Sagar Kaushik
kisi ko yaad meri aa rahi thii
kisi ko yaad meri aa rahi thii | किसी को याद मेरी आ रही थी
- Sagar Kaushik
किसी
को
याद
मेरी
आ
रही
थी
मैं
उसकी
सम्त
चलता
जा
रहा
था
- Sagar Kaushik
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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मुझे
एक
लाश
कहकर
न
बहाओ
पानियों
में
मेरा
हाथ
छू
के
देखो
मेरी
नब्ज़
चल
रही
है
Azm Shakri
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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ग़ुबार-ए-वक़्त
में
अब
किस
को
खो
रही
हूँ
मैं
ये
बारिशों
का
है
मौसम
कि
रो
रही
हूँ
मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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वो
दरिया
रोक
कर
बैठी
है
जाने
कितने
बरसों
से
मैं
कब
से
आस
में
हूॅं
कब
मिरा
दामन
भिगोएगी
Sagar Kaushik
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मुझको
मेरी
जगह
मिली
ही
नइँ
ये
मेरा
युग
मेरी
सदी
ही
नइँ
आज
सब
आँसुओं
ने
धो
डाला
आज
कोई
ग़ज़ल
हुई
ही
नइँ
मेरा
कुत्तों
से
है
बड़ा
नाता
मेरे
कुन्बे
में
आदमी
ही
नइँ
आज
काफ़ी
ख़ुशी
का
दिन
है
और
मुझको
इस
बात
की
ख़ुशी
ही
नइँ
ज़िंदगी
मुझको
है
अज़ीज़
मगर
मुझ
में
अब
ज़िंदगी
बची
ही
नइँ
सब
को
कोई
न
कोई
जल्दी
है
एक
मैं
हूँ
कि
हड़बड़ी
ही
नइँ
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Sagar Kaushik
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दूरी
से
भी
इन
में
दूरी
नइँ
आती
दिल
के
रिश्ते
दिल
के
रिश्ते
होते
हैं
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Sagar Kaushik
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कभी
कहीं
जो
मिलो
तो
तुम
पे
मैं
सारा
ग़ुस्सा
उतार
लूँगा
तुम्हारे
माथे
को
चूम
कर
मैं
तुम्हारा
सदक़ा
उतार
लूँगा
उदास
लम्हों
में
मैं
कभी
भी
तुम्हें
अकेला
न
रहने
दूँगा
मैं
अपनी
ज़ुल्फ़ें
बिगाड़
लूँगा
मैं
अपना
चेहरा
उतार
लूँगा
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Sagar Kaushik
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ऐसा
नहीं
सहता
नहीं
बस
तुम
सेे
कुछ
कहता
नहीं
थोड़ी
सी
जो
पी
लूँ
शराब
औक़ात
में
रहता
नहीं
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Sagar Kaushik
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