raat mere KHvaab men thii aaj mujhko vo mili | रात मेरे ख़्वाब में थी आज मुझको वो मिली

  - Sagar Kaushik
रातमेरेख़्वाबमेंथीआजमुझकोवोमिली
तीरगीमेंइकहसींमहताबसीजोथीखिली
आजदेखाहैउसेमैंनेलिबास-ए-ईदमें
आजमुझकाफ़िरकोभीहैईदकीईदीमिली
उसकीचौखटकोनमनकरकेमैंजबसेआयाहूँ
देखकरहैरानहैंमेरीसभीज़िंदादिली
जानपरअपनीबनीतोलोगचिल्लानेलगे
कलतमाशादेखतेथे,सबज़बानेंथींसिली
नोंचडालाहैउसेफिरसेकिसीहैवानने
इकसुगमसुंदरकलीजोताज़ा-ताज़ाथीखिली
रामजीभीमुग्धहोकरगालियाँसुनतेरहे
इतनीमीठीइतनीपावनहैहमारीमैथिली
रातजागेसेतुझेक्यामिलगया'सागर'बता
येग़ज़लकेचंदमिसरे,दुनियाभरकीबे-दिली
  - Sagar Kaushik
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