ek pal aur jeene ki chaahat nahin | एक पल और जीने की चाहत नहीं

  - Sagar Kaushik
एकपलऔरजीनेकीचाहतनहीं
अबकिसीसेभीकोईशिकायतनहीं
ज़िंदगीतूबताक्याख़ताहैमिरी
क्यूँमुझेएकपलकीभीराहतनहीं
ख़ुदातूनेमुझकोबनायाहीक्यूँ
इसजहाँकोमिरीजबज़रूरतनहीं
मैंखड़ाहूँज़मीरोंकेबाज़ारमें
आदमीकीयहाँकोईक़ीमतनहीं
कौड़ियोंमेंहुनरबेचआयाहूँमैं
सिर्फ़फ़नज़िंदगीकीज़रूरतनहीं
खु़दकीनज़रोंमेंइतनागिराहूँकिअब
ख़ुदसेनज़रेंमिलानेकीहिम्मतनहीं
उम्रभरकीथकनकायेअंजामहै
इकक़दमऔरचलनेकीताक़तनहीं
  - Sagar Kaushik
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