rakhe har ik qadam pe jo mushkil ki aagahi | रक्खे हर इक क़दम पे जो मुश्किल की आगही

  - Sabeela Inam Siddiqui
रक्खेहरइकक़दमपेजोमुश्किलकीआगही
मिलतीहैउसकोराहसेमंज़िलकीआगही
सीखाहैआदमीनेकईतजरबोंकेबा'द
तूफ़ानसेहीमिलतीहैसाहिलकीआगही
उसकाख़ुदासराब्ताहीकुछअजीबहै
दुनियाकहाँसमझतीहैसाइलकीआगही
नज़रोंकाए'तिबारतोहैफिरभीमेरादिल
हैइकसहीफ़ाजिसमेंमसाइलकीआगही
दिन-रातजिसकेप्यारमेंरहतीहूँबे-क़रार
उसकोनहींहैक्यूँँदिल-ए-बिस्मिलकीआगही
यादोंकेइकहुजूममेंरहकरपताचला
तन्हाईभीतोरखतीहैमहफ़िलकीआगही
ख़ंजरकाए'तिबारनहींवोतोसाफ़है
लेकिनमिलेगीख़ूनसेक़ातिलकीआगही
मश्क़-ए-सुख़न'सबीला'निखारेगीफ़नकोऔर
मतलूबहैकुछऔरअभीदिलकीआगही
  - Sabeela Inam Siddiqui
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