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Saarthi Baidyanath
kabhi joote kabhi apni ghadi ko dekhta hai
kabhi joote kabhi apni ghadi ko dekhta hai | कभी जूते कभी अपनी घड़ी को देखता है
- Saarthi Baidyanath
कभी
जूते
कभी
अपनी
घड़ी
को
देखता
है
इसी
मीज़ान
पर
वो
आदमी
को
देखता
है
- Saarthi Baidyanath
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गिरजा
में
मंदिरों
में
अज़ानों
में
बट
गया
होते
ही
सुब्ह
आदमी
ख़ानों
में
बट
गया
Nida Fazli
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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संग-ए-मरमर
की
मूरत
नहीं
आदमी
इस
क़दर
ख़ूब-सूरत
नहीं
आदमी
चंद
क़िस्सों
की
दरकार
है
बस
इसे
आदमी
की
ज़रूरत
नहीं
आदमी
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anupam shah
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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इत्तिफ़ाक़
अपनी
जगह
ख़ुश-क़िस्मती
अपनी
जगह
ख़ुद
बनाता
है
जहाँ
में
आदमी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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है
खुली
छूट
तेरी
आँखों
को
रफ़्ता
रफ़्ता
मुझे
हलाल
करे
Saarthi Baidyanath
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इश्क़
हूँ
मैं
और
वो
मुझ
सेे
बनी
है
वो
मोहब्बत
है
सो
मैं
उस
सेे
बना
हूँ
Saarthi Baidyanath
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दर्द
जब
दिल
का
दो-बाला
हो
गया
चेहरा-चेहरा
इक
रिसाला
हो
गया
रात
भर
पढ़ते
रहे
हम
चाँद
को
आ
समाँ
इक
पाठशाला
हो
गया
लोरियाँ
माँ
ने
सुनाई
और
फिर
मेरे
सपनों
में
उजाला
हो
गया
जब
अना
कुचली
गई
तो
ये
हुआ
आँख
रोई
दिल
में
छाला
हो
गया
है
मुहब्बत
आब-ए-ज़मज़म
की
तरह
पी
लिया
जिसने
वो
आला
हो
गया
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Saarthi Baidyanath
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ज़िन्दगी
तुझ
सेे
शिकायत
क्या
करूँँ
मुस्कुराने
की
है
आदत
क्या
करूँँ
चाँद
सा
महबूब
मेरे
पास
है
मैं
सितारों
से
मोहब्बत
क्या
करूँँ
आख़िरी
अंजाम
सबको
है
पता
रौशनी
तेरी
हिफ़ाज़त
क्या
करूँँ
जाएगी
अब
इस
ज़ईफ़ी
में
कहाँ
शा'इरी
की
ये
बुरी
लत
क्या
करूँँ
दफ़्न
कर
दूँ
या
जला
दूँ
बोलिए
'सारथी'
का
आख़िरी
ख़त
क्या
करूँँ
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Saarthi Baidyanath
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ज़लील
जितना
हुए
नौकरी
के
चक्कर
में
कभी
न
इतना
हुए
छोकरी
के
चक्कर
में
Saarthi Baidyanath
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