kyun na ham soch ke saanche men hi dhal kar dekhen | क्यूँँ न हम सोच के साँचे में ही ढल कर देखें

  - Saadullah Shah
क्यूँँहमसोचकेसाँचेमेंहीढलकरदेखें
वोजोक़ाएमहैतोफिरख़ुदकोबदलकरदेखें
गोमसाफ़तहैकठिनऔररस्ताकोई
लेकिनइसहालमेंअच्छाहैकिचलकरदेखें
हममोहब्बतकोमुकम्मलनहींज़ाहिरकरते
वोहिना-बर्गकोचुटकीमेंमसलकरदेखें
ज़िंदगीमौतमेंमख़्फ़ीहैयक़ीननअपनी
मिस्ल-ए-परवानाचलोहमभीतोजलकरदेखें
एककोशिशजोहैउसकीउसेअंजामतोदें
इसकीख़्वाहिशपेज़रादेरकोटलकरदेखें
'साद'लोगोंसेतवक़्क़ो'होतोकिसबातपेहो
मूँगछातीपेमिरेरोज़वोदलकरदेखें
  - Saadullah Shah
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