sabhi se door biyaabaan men rah rahe hain hamna sun rahe hain kisi ki na kah rahe hain ham | सभी से दूर बयाबाँ में रह रहे हैं हम

  - Saabir Usmani
सभीसेदूरबयाबाँमेंरहरहेहैंहम
सुनरहेहैंकिसीकीकहरहेहैंहम
रवाँनदीतोनहींहैमगरहवाकेसंग
ग़ुबारबनकेज़मानेसेबहरहेहैंहम
किसीग़रीबकेटूटेहुएमकाँकीतरह
ज़राज़राहीसहीरोज़ढहरहेहैंहम
खुलीकिताबसीयेज़िंदगीहमारीहै
वरक़वरक़हैंउड़ेसबतहरहेहैंहम
भटकरहेहैंतबस्सुमकीचाहदिलमेंलिए
मिलेहैरंजफ़क़तजिसजगहरहेहैंहम
हमेंभीखुलकेचमकनेनहींदिया'साबिर'
जिसेहोअब्रनेघेरावोमहरहेहैंहम
  - Saabir Usmani
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