nikal pada hai vo suraj nayi tapan le kar | निकल पड़ा है वो सूरज नई तपन ले कर

  - Saabir Usmani
निकलपड़ाहैवोसूरजनईतपनलेकर
चलाहैलेकेवोबर्छीकिफिरकिरनलेकर
जोमेरेहिस्साकाबादलहैक्यूँनहींबरसा
कहाँमैंजाऊँभलातनकीयेअगनलेकर
हरएकशख़्सगयाछोड़करमुझेआगे
कहींमैंमरहीजाऊँयहीजलनलेकर
फ़क़ीरहमहैंकिझोलाउठाकेचलदेंगे
कहाँकहाँलिएफिरतेरहेंगेधनलेकर
ज़मींपेचाँदसितारेउतारलाएँगे
चलेहैंदिलमेंहमअपनेयहीलगनलेकर
बिरहकीमारीमैंबिरहनकहाँसेसुखभोगूँ
चुराकेमेरीख़ुशीसबगयासजनलेकर
गुलाबहोंटोंमेंज़ुल्फ़ोंमेंयासमेंउनके
वोघरसेनिकलेहैंख़ुशबू-भराबदनलेकर
दयार-ए-यारमेंहमछोड़आएदिल'साबिर'
किलौटआएहैंअपनानिढालतनलेकर
  - Saabir Usmani
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