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RUSHIKESH PAWAR
sapne men kal ik deewaana dekha
sapne men kal ik deewaana dekha | सपने में कल इक दीवाना देखा
- RUSHIKESH PAWAR
सपने
में
कल
इक
दीवाना
देखा
नींद
खुली
फिर
उसका
जाना
देखा
- RUSHIKESH PAWAR
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हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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चमेली
रात
कह
रही
थी
मेरी
बू
लिया
करें
और
इस
सेे
जी
नहीं
भरे
तो
मुझको
छू
लिया
करें
कभी
भी
अच्छे
देवता
नहीं
बनेंगे
ऐसे
आप
चढ़ावे
में
रुपए
नहीं
फ़क़त
लहू
लिया
करें
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Azbar Safeer
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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चाँद
तारे
इक
दिया
और
रात
का
कोमल
बदन
सुब्ह-दम
बिखरे
पड़े
थे
चार
सू
मेरी
तरह
Aziz Nabeel
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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आज
की
रात
भी
गुज़री
है
मिरी
कल
की
तरह
हाथ
आए
न
सितारे
तिरे
आँचल
की
तरह
Ameer Qazalbash
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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"एक
सूरत
एक
सी
तस्वीर
है"
यानी
दोनों
ही
तरफ़
कश्मीर
है
ये
नहीं
तो
दूसरी
मौजूद
है
आपकी
कितनी
सही
तक़दीर
है
भागने
वाले
खज़ाना
ले
गए
इसलिए
भी
घर
में
सब
दिलगीर
है
जंग
अपनी
हिज्र
से
कैसे
लड़ूं
आँख
में
आँसू
है
दिल
में
तीर
है
कौन
सा
दफ़्तर
है
कैसे
लोग
है
हाथ
पर
घड़ियाँ
नहीं
ज़ंजीर
है
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RUSHIKESH PAWAR
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मत
दिला
याद
बिखर
जाऊँगा
दिल
पुकारा
मैं
सुधर
जाऊँगा
रूठकर
घर
से
निकल
आया
हूँ
रात
होगी
तो
किधर
जाऊँगा
वक़्त
के
साथ
बिगड़ता
ही
गया
उसको
लगता
था
सुधर
जाऊँगा
घर
में
शीशा
ही
नहीं
है
मेरे
उसकी
आँखों
में
सँवर
जाऊँगा
जो
भी
मिलता
हैं
यही
पूछता
है
गांव
से
कब
मैं
शहर
जाऊँगा
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RUSHIKESH PAWAR
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वो
ग़म
में
है
उसके
ग़मों
को
भगा
दो
यही
वक़्त
है
उसको
अपना
बना
लो
RUSHIKESH PAWAR
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तेरे
इंतेज़ार
के
लम्हें
कितने
लंबे
हो
गए
घर
के
बाहर
रुके
और
लाइट
के
खंबे
हो
गए
RUSHIKESH PAWAR
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प्यार
को
जानना
तो
सही
है
मगर
प्यार
होने
में
इक
उम्र
लग
जाती
है
RUSHIKESH PAWAR
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