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RUSHIKESH PAWAR
ek soorat ek si tasveer hai
ek soorat ek si tasveer hai | "एक सूरत एक सी तस्वीर है"
- RUSHIKESH PAWAR
"एक
सूरत
एक
सी
तस्वीर
है"
यानी
दोनों
ही
तरफ़
कश्मीर
है
ये
नहीं
तो
दूसरी
मौजूद
है
आपकी
कितनी
सही
तक़दीर
है
भागने
वाले
खज़ाना
ले
गए
इसलिए
भी
घर
में
सब
दिलगीर
है
जंग
अपनी
हिज्र
से
कैसे
लड़ूं
आँख
में
आँसू
है
दिल
में
तीर
है
कौन
सा
दफ़्तर
है
कैसे
लोग
है
हाथ
पर
घड़ियाँ
नहीं
ज़ंजीर
है
- RUSHIKESH PAWAR
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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लहू
वतन
के
शहीदों
का
रंग
लाया
है
उछल
रहा
है
ज़माने
में
नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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हमेशा
इक
दूसरे
के
हक़
में
दु'आ
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
मिलें
या
बिछड़ें
मगर
तुम्हीं
से
वफ़ा
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
Shabeena Adeeb
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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शब
के
सन्नाटे
में
ये
किस
का
लहू
गाता
है
सरहद-ए-दर्द
से
ये
किस
की
सदा
आती
है
Ali Sardar Jafri
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न
जाने
ख़त्म
हुई
कब
हमारी
आज़ादी
तअल्लुक़ात
की
पाबंदियाँ
निभाते
हुए
Azhar Iqbal
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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निगाह-ए-गर्म
क्रिसमस
में
भी
रही
हम
पर
हमारे
हक़
में
दिसम्बर
भी
माह-ए-जून
हुआ
Akbar Allahabadi
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प्यार
को
जानना
तो
सही
है
मगर
प्यार
होने
में
इक
उम्र
लग
जाती
है
RUSHIKESH PAWAR
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वो
ग़म
में
है
उसके
ग़मों
को
भगा
दो
यही
वक़्त
है
उसको
अपना
बना
लो
RUSHIKESH PAWAR
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सपने
में
कल
इक
दीवाना
देखा
नींद
खुली
फिर
उसका
जाना
देखा
RUSHIKESH PAWAR
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मत
दिला
याद
बिखर
जाऊँगा
दिल
पुकारा
मैं
सुधर
जाऊँगा
रूठकर
घर
से
निकल
आया
हूँ
रात
होगी
तो
किधर
जाऊँगा
वक़्त
के
साथ
बिगड़ता
ही
गया
उसको
लगता
था
सुधर
जाऊँगा
घर
में
शीशा
ही
नहीं
है
मेरे
उसकी
आँखों
में
सँवर
जाऊँगा
जो
भी
मिलता
हैं
यही
पूछता
है
गांव
से
कब
मैं
शहर
जाऊँगा
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RUSHIKESH PAWAR
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तेरे
इंतेज़ार
के
लम्हें
कितने
लंबे
हो
गए
घर
के
बाहर
रुके
और
लाइट
के
खंबे
हो
गए
RUSHIKESH PAWAR
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