hain apni kahii an | हैं अपनी कही, अनकही से परेशाँ

  - Rohan Kaushik
हैंअपनीकही,अनकहीसेपरेशाँ
सुख़न-वरहैंख़ुदशा'इरीसेपरेशाँ
चराग़ाँसेपहलेज़रासोचनाथा
हैसचमेंकोईतीरगीसेपरेशाँ?
नमकघोलते-घोलतेथकगयाहै
समुंदरहैज़िद्दीनदीसेपरेशाँ
लगाएँभीआख़िरयेइल्ज़ामकिसपर?
किसीकेसबबहैं,किसीसेपरेशाँ
तुमअपनेहीअपनेमेंजिसतौरगुमहो
कहींहोजानाख़ुदीसेपरेशाँ
  - Rohan Kaushik
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy