kitne dukhro ki tarjumaani hai | कितने दुखड़ो की तर्जुमानी है

  - Rohan Kaushik
कितनेदुखड़ोकीतर्जुमानीहै
आपनेकहदिया"कहानीहै"
अव्वलनफ़ैसलाकियाजाए
राब्तायाअनाबचानीहै
शामतकघरभीलौटनाहैहमें
रातकीकिश्तभीचुकानीहै
फ़ैसलाशाहकोहीकरनाहै
जीतनाहैकिमातखानीहै
मौतकाइकसवालकाफ़ीथा
"किसलिएज़िंदगीबचानीहै?"
राब्ताज्यूँकात्योंहीरखनाहै
फिरयेदीवारक्यूँँगिरानीहै?
सिर्फ़प्यासेहीदेखसकतेहैं
किसकीआँखोंमेंकितनापानीहै
  - Rohan Kaushik
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