nazar uthaaye to kya kya fasana banta hai | नज़र उठाएँ तो क्या क्या फ़साना बनता है

  - Rehman Faris
नज़रउठाएँतोक्याक्याफ़सानाबनताहै
सौपेश-ए-यारनिगाहेंझुकानाबनताहै
वोलाखबे-ख़बर-ओ-बे-वफ़ासहीलेकिन
तलबकियाहैगरउसनेतोजानाबनताहै
रगोंतलकउतरआईहैज़ुल्मत-ए-शब-ए-ग़म
सोअबचराग़नहींदिलजलानाबनताहै
पराईआगमिराघरजलारहीहैसोअब
ख़मोशरहनानहींग़ुलमचानाबनताहै
क़दमक़दमपेतवाज़ुनकीबातमतकीजे
येमय-कदाहैयहाँलड़खड़ानाबनताहै
बिछड़नेवालेतुझेकिसतरहबताऊँमैं
कियादआनानहींतेराआनाबनताहै
येदेखकरकितिरेआशिक़ोंमेंमैंभीहूँ
जमाल-ए-यारतिरामुस्कुरानाबनताहै
जुनूँभीसिर्फ़दिखावाहैवहशतेंभीग़लत
दिवानाहैनहीं'फ़ारिस'दिवानाबनताहै
  - Rehman Faris
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