sukoot-e-shaam men goonji sadaa udaasi ki | सुकूत-ए-शाम में गूँजी सदा उदासी की

  - Rehman Faris
सुकूत-ए-शाममेंगूँजीसदाउदासीकी
किहैमज़ीदउदासीदवाउदासीकी
बहुतशरीरथामैंऔरहँसताफिरताथा
फिरइकफ़क़ीरनेदेदीदु'आउदासीकी
उमूर-ए-दिलमेंकिसीतीसरेकादख़्लनहीं
यहाँफ़क़ततिरीचलतीहैयाउदासीकी
चराग़-ए-दिलकोज़राएहतियातसेरखना
किआजरातचलेगीहवाउदासीकी
वोइम्तिज़ाजथाऐसाकिदंगथीहरआँख
जमाल-ए-यारनेपहनीक़बाउदासीकी
इसीउमीदपेआँखेंबरसतीरहतीहैं
किएकदिनतोसुनेगाख़ुदाउदासीकी
शजरनेपूछाकितुझमेंयेकिसकीख़ुशबूहै
हवा-ए-शाम-ए-अलमनेकहाउदासीकी
दिल-ए-फ़सुर्दाकोमैंनेतोमारहीडाला
सोमैंतोठीकहूँअबतूसुनाउदासीकी
ज़रासाछूलेंतोघंटोंदहकतीरहतीहै
हमेंतोमारगईयेअदाउदासीकी
बहुतदिनोंसेमैंउससेनहींमिला'फ़ारिस'
कहींसेख़ैर-ख़बरलेकेउदासीकी
  - Rehman Faris
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