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Raushan miyaa'n
jo taqdeer likha so hove
jo taqdeer likha so hove | जो तक़दीर लिखा सो होवे
- Raushan miyaa'n
जो
तक़दीर
लिखा
सो
होवे
फिर
तदबीर
की
पर्वा
कैसी
- Raushan miyaa'n
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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जिन
की
दर्द-भरी
बातों
से
एक
ज़माना
राम
हुआ
'क़ासिर'
ऐसे
फ़न-कारों
की
क़िस्मत
में
बन-बास
रहा
Ghulam Mohammad Qasir
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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डूब
के
मर
गया
कहते
ही
बेचारा
कोई
अब
नहीं
आता
नज़र
मुझको
किनारा
कोई
दीद
को
आँखें
तरस
जाती
है
पागल
मेरी
मिल
के
मुझको
नहीं
मिलता
है
दोबारा
कोई
इतना
पागल
हो
गया
हूँ
मैं
मोहब्बत
में
मियाँ
सोचता
हूँ
कि
वो
ही
कर
दे
इशारा
कोई
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Raushan miyaa'n
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नाम
ऐसा
है
मियाँ
रौशन
का
नाम
से
शहर
पता
लग
जाए
Raushan miyaa'n
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दुश्मन
भी
है
भाई
अपना
ऐसा
कहता
ये
भारत
है
Raushan miyaa'n
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क्या
हमें
है
मिला
वफ़ा
कर
के
ज़ख़्म
उसने
दिए
दवा
कर
के
एक
दिन
मरना
है
मुझे
लेकिन
मरना
भी
है
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
कोई
उम्मीद
अब
नहीं
बाक़ी
हारना
है
मुकाबला
कर
के
ये
यहाँ
का
रिवाज़
है
आक़ा
ज़हर
दो
और
मुस्कुरा
कर
के
कौन
क़ाइल
नहीं
तिरा
रौशन
लोग
कहते
हैं
फुसफुसा
कर
के
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Raushan miyaa'n
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बद-दुआ
काम
कर
गई
आख़िर
मेरी
साँसें
ठहर
गई
आख़िर
Raushan miyaa'n
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