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Raushan miyaa'n
naam aisa hai miyaan raushan ka
naam aisa hai miyaan raushan ka | नाम ऐसा है मियाँ रौशन का
- Raushan miyaa'n
नाम
ऐसा
है
मियाँ
रौशन
का
नाम
से
शहर
पता
लग
जाए
- Raushan miyaa'n
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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मिरी
रौशनी
तिरे
ख़द्द-ओ-ख़ाल
से
मुख़्तलिफ़
तो
नहीं
मगर
तू
क़रीब
आ
तुझे
देख
लूँ
तू
वही
है
या
कोई
और
है
Saleem Kausar
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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लड़कियाँ
बैठी
थीं
पाँव
डालकर
रौशनी
सी
हो
गई
तालाब
में
Parveen Shakir
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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हर
इक
मकाँ
में
जला
फिर
दिया
दिवाली
का
हर
इक
तरफ़
को
उजाला
हुआ
दिवाली
का
Nazeer Akbarabadi
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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इस
दिल
को
तुम्हारी
आदत
है
ये
आदत
बेशक
ईनत
है
तुम
से
ही
तो
जाना
हमने
हम
पे
अल्लाह
कि
रहमत
है
इक
यार
फ़रेबी
को
साहिब
दुनिया
मिटने
की
दहशत
है
पलपल
में
मिरा
हसना
रोना
ज़ाहिद
ये
ख़ुदा
की
नेमत
है
मैकश
पे
ये
कैसा
ज़ुल्म
ख़ुदा
हर
पैमाने
में
शर्बत
है
है
तेग़
मिरी
गर्दन
पे
मिरे
किस
मुँह
से
कहूँ
क्या
हसरत
है
दुश्मन
भी
है
भाई
अपना
ऐसा
कहता
ये
भारत
है
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Raushan miyaa'n
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किसी
दैर
मस्जिद
चराग़ाँ
नहीं
है
कैसा
ये
पागल
ज़माना
नया
Raushan miyaa'n
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टूट
के
वो
किधर
गया
होगा
काँच
जैसे
बिखर
गया
होगा
ख़ामुशी
से
यहाँ
की
ज़ाहिर
है
कोई
दीवाना
मर
गया
होगा
याद
बेटे
को
आ
गई
माँ
की
फोन
से
पेट
भर
गया
होगा
हम
ने
कुत्ते
का
पट्टा
खोला
यूँँ
सोचा
था
वो
सुधर
गया
होगा
भूल
कासिम
गली
को
फिर
ग़ालिब
मदिरालय
ठहर
गया
होगा
और
मय-ख़्वार
जाएगा
किस
पर
अपने
ही
बाप
पर
गया
होगा
गुफ़्तगू
बिन
किए
हमें
उन
से
एक
अर्सा
गुज़र
गया
होगा
छोड़
कैराना
को
भई
'रौशन'
राम
जाने
किधर
गया
होगा
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Raushan miyaa'n
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यूँँ
तलब
है
हमें
आपकी
रात
में
इक
मुसाफ़िर
को
जूँ
रौशनी
चाहिए
Raushan miyaa'n
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रोज़
हालात
भूल
जाते
हैं
पाँव
औक़ात
भूल
जाते
हैं
हम
तो
इतने
शरीफ़
है
साहब
कह
के
हर
बात
भूल
जाते
हैं
मुँह
ज़बानी
लगा
के
रट्टा
हम
या-ख़ुदा
नात
भूल
जाते
हैं
तेरे
जैसे
कभी
कभी
रौशन
इश्क़
में
ज़ात
भूल
जाते
हैं
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Raushan miyaa'n
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