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Raushan miyaa'n
kisi dair masjid charaaghaan nahin
kisi dair masjid charaaghaan nahin | किसी दैर मस्जिद चराग़ाँ नहीं
- Raushan miyaa'n
किसी
दैर
मस्जिद
चराग़ाँ
नहीं
है
कैसा
ये
पागल
ज़माना
नया
- Raushan miyaa'n
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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न
तुम्हें
होश
रहे
और
न
मुझे
होश
रहे
इस
क़दर
टूट
के
चाहो
मुझे
पागल
कर
दो
Wasi Shah
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तुम
मुझे
छोड़
के
जाओगे
तो
मर
जाऊँगा
यूँँ
करो
जाने
से
पहले
मुझे
पागल
कर
दो
Bashir Badr
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हम
दोनों
मिल
कर
भी
दिलों
की
तन्हाई
में
भटकेंगे
पागल
कुछ
तो
सोच
ये
तूने
कैसी
शक्ल
बनाई
है
Jaun Elia
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तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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इक
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत
का
अदना
ये
फ़साना
है
सिमटे
तो
दिल-ए-आशिक़
फैले
तो
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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दुश्मन
भी
है
भाई
अपना
ऐसा
कहता
ये
भारत
है
Raushan miyaa'n
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क्या
हमें
है
मिला
वफ़ा
कर
के
ज़ख़्म
उसने
दिए
दवा
कर
के
एक
दिन
मरना
है
मुझे
लेकिन
मरना
भी
है
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
कोई
उम्मीद
अब
नहीं
बाक़ी
हारना
है
मुकाबला
कर
के
ये
यहाँ
का
रिवाज़
है
आक़ा
ज़हर
दो
और
मुस्कुरा
कर
के
कौन
क़ाइल
नहीं
तिरा
रौशन
लोग
कहते
हैं
फुसफुसा
कर
के
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Raushan miyaa'n
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तुम
अलग
हो
यार
उन
सब
बाक़ियों
से
इश्क़
तुम
से
है
था
मतलब
बाक़ियों
से
तेरे
दीवाने
का
'आशिक़
का
तिरे
यूँँ
मुख़्तलिफ़
क्यूँँ
फ़ैसला
रब
बाक़ियों
से
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Raushan miyaa'n
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ये
हक़ीक़त
है
हक़ीक़त
बातें
पड़ती
है
गाल
पे
रहपट
कि
तरह
Raushan miyaa'n
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रात
भर
चुभता
है
तन्हाई
का
ख़ंजर
मुझको
एक
शाइर
ने
कहा
था
कभी
शायर
मुझको
Raushan miyaa'n
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