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Rashida Maheen Malik
kibla ae mohtaram aapke shahr men
kibla ae mohtaram aapke shahr men | किबला ए मोहतरम आपके शह्र में
- Rashida Maheen Malik
किबला
ए
मोहतरम
आपके
शह्र
में
लूट
गए
आज
हम
आपके
शह्र
में
आप
खोने
लगे
आपको
ढूँढ़
कर
खोने
लग
जाए
हम
आपके
शह्र
में
साँस
तेज़ी
से
चलने
लगी
है
मेरी
रुक
गए
है
कदम
आपके
शह्र
में
तितलियाँ
रास्तों
में
बनाती
रही
खुश्बुओं
के
कदम
आपके
शह्र
में
- Rashida Maheen Malik
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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ये
शबनमी
लहजा
है
आहिस्ता
ग़ज़ल
पढ़ना
तितली
की
कहानी
है
फूलों
की
ज़बानी
है
Bashir Badr
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दो
नन्हीं
कलियों
ने
रोक
लिया
वरना
तितली
ने
तो
आज
धतूरा
खाना
था
Shruti chhaya
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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किताबों
से
निकल
कर
तितलियाँ
ग़ज़लें
सुनाती
हैं
टिफ़िन
रखती
है
मेरी
माँ
तो
बस्ता
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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उस
दिन
मेरे
लब
पे
तितली
बैठती
है
जिस
दिन
तेरे
लब
को
चूमा
होता
है
Bhavesh Pathak
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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मोहब्बत
को
अक़ीदा
आशिक़ी
को
दीन
कहता
था
कोई
था
जो
मेरी
हर
बात
पर
आमीन
कहता
था
वो
हर
हर
साँस
में
जपता
था
मेरे
नाम
की
माला
कभी
मेहताब
कहता
था
कभी
माहीन
कहता
था
उसे
हर
ज़ाइक़ा
मिलता
था
मेरे
नर्म
होंठो
से
कभी
शीरीं
बताता
था
कभी
नमकीन
कहता
था
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Rashida Maheen Malik
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रात
के
पिछले
पहर
की
मीठी
सर्दी
मेरी
आँखें
चूम
आँखें
चूम
के
थक
जाए
तू
फिर
भी
मेरी
आँखें
चूम
शर्म
कहाँ
से
ले
आते
हो
इसका
इश्क़
में
कैसा
काम
देख
बरत
मत
मुझ
सेे
नरमी
जानी
मेरी
आँखें
चूम
लम्स
लबों
का
जादूगर
है
जादू
करके
छोड़ेगा
तू
बस
चुपके
चुपके
जल्दी
जल्दी
मेरी
आँखें
चूम
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Rashida Maheen Malik
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