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Rashida Maheen Malik
mohabbat ko aqeeda aashiqi ko deen kahtaa tha
mohabbat ko aqeeda aashiqi ko deen kahtaa tha | मोहब्बत को अक़ीदा आशिक़ी को दीन कहता था
- Rashida Maheen Malik
मोहब्बत
को
अक़ीदा
आशिक़ी
को
दीन
कहता
था
कोई
था
जो
मेरी
हर
बात
पर
आमीन
कहता
था
वो
हर
हर
साँस
में
जपता
था
मेरे
नाम
की
माला
कभी
मेहताब
कहता
था
कभी
माहीन
कहता
था
उसे
हर
ज़ाइक़ा
मिलता
था
मेरे
नर्म
होंठो
से
कभी
शीरीं
बताता
था
कभी
नमकीन
कहता
था
- Rashida Maheen Malik
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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ये
कहना
था
उन
से
मोहब्बत
है
मुझ
को
ये
कहने
में
मुझ
को
ज़माने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
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तुम
मेरी
पहली
मोहब्बत
तो
नहीं
हो
लेकिन
मैंने
चाहा
है
तुम्हें
पहली
मोहब्बत
की
तरह
Wasi Shah
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कभी
ये
भी
नहीं
पूछा
है
गर्दन
पे
निशाँ
कैसा
हमें
अंधी
मोहब्बत
थी
हमें
अंधा
भरोसा
था
Shayra kirti
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भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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रात
के
पिछले
पहर
की
मीठी
सर्दी
मेरी
आँखें
चूम
आँखें
चूम
के
थक
जाए
तू
फिर
भी
मेरी
आँखें
चूम
शर्म
कहाँ
से
ले
आते
हो
इसका
इश्क़
में
कैसा
काम
देख
बरत
मत
मुझ
सेे
नरमी
जानी
मेरी
आँखें
चूम
लम्स
लबों
का
जादूगर
है
जादू
करके
छोड़ेगा
तू
बस
चुपके
चुपके
जल्दी
जल्दी
मेरी
आँखें
चूम
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Rashida Maheen Malik
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किबला
ए
मोहतरम
आपके
शह्र
में
लूट
गए
आज
हम
आपके
शह्र
में
आप
खोने
लगे
आपको
ढूँढ़
कर
खोने
लग
जाए
हम
आपके
शह्र
में
साँस
तेज़ी
से
चलने
लगी
है
मेरी
रुक
गए
है
कदम
आपके
शह्र
में
तितलियाँ
रास्तों
में
बनाती
रही
खुश्बुओं
के
कदम
आपके
शह्र
में
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Rashida Maheen Malik
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