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Rashida Maheen Malik
raat ke pichhle pahar ki meethi sar
raat ke pichhle pahar ki meethi sar | रात के पिछले पहर की मीठी सर्दी मेरी आँखें चूम
- Rashida Maheen Malik
रात
के
पिछले
पहर
की
मीठी
सर्दी
मेरी
आँखें
चूम
आँखें
चूम
के
थक
जाए
तू
फिर
भी
मेरी
आँखें
चूम
शर्म
कहाँ
से
ले
आते
हो
इसका
इश्क़
में
कैसा
काम
देख
बरत
मत
मुझ
सेे
नरमी
जानी
मेरी
आँखें
चूम
लम्स
लबों
का
जादूगर
है
जादू
करके
छोड़ेगा
तू
बस
चुपके
चुपके
जल्दी
जल्दी
मेरी
आँखें
चूम
- Rashida Maheen Malik
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आज
की
रात
भी
गुज़री
है
मिरी
कल
की
तरह
हाथ
आए
न
सितारे
तिरे
आँचल
की
तरह
Ameer Qazalbash
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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इश्क़
पहले
बना
था
जाने
जाँ
नींद
की
गोलियाँ
बनीं
थीं
फिर
Ashutosh Kumar "Baagi"
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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मोहब्बत
को
अक़ीदा
आशिक़ी
को
दीन
कहता
था
कोई
था
जो
मेरी
हर
बात
पर
आमीन
कहता
था
वो
हर
हर
साँस
में
जपता
था
मेरे
नाम
की
माला
कभी
मेहताब
कहता
था
कभी
माहीन
कहता
था
उसे
हर
ज़ाइक़ा
मिलता
था
मेरे
नर्म
होंठो
से
कभी
शीरीं
बताता
था
कभी
नमकीन
कहता
था
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Rashida Maheen Malik
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किबला
ए
मोहतरम
आपके
शह्र
में
लूट
गए
आज
हम
आपके
शह्र
में
आप
खोने
लगे
आपको
ढूँढ़
कर
खोने
लग
जाए
हम
आपके
शह्र
में
साँस
तेज़ी
से
चलने
लगी
है
मेरी
रुक
गए
है
कदम
आपके
शह्र
में
तितलियाँ
रास्तों
में
बनाती
रही
खुश्बुओं
के
कदम
आपके
शह्र
में
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Rashida Maheen Malik
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