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Atul K Rai
suraj ke aate hi kaise chhantne lagta hai kohra
suraj ke aate hi kaise chhantne lagta hai kohra | सूरज के आते ही कैसे छँटने लगता है कोहरा
- Atul K Rai
सूरज
के
आते
ही
कैसे
छँटने
लगता
है
कोहरा
आ
जाओ
तुम
रस्ते
से
अवरोध
स्वयं
हट
जाएँगे
- Atul K Rai
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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बदला
जो
वक़्त
गहरी
रफ़ाक़त
बदल
गई
सूरज
ढला
तो
साए
की
सूरत
बदल
गई
इक
उम्र
तक
मैं
उसकी
ज़रूरत
बना
रहा
फिर
यूँँ
हुआ
कि
उसकी
ज़रूरत
बदल
गई
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Shaukat Fehmi
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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आज
की
रात
न
जाने
कितनी
लंबी
होगी
आज
का
सूरज
शाम
से
पहले
डूब
गया
है
Aanis Moin
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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ये
लाल
शा
में
ये
लाल
अंबर
ये
लाल
सूरज
चमक
रहा
है
मुझे
बता
दो
कहाँ
है
खोई
तिरे
लबों
की
ये
सुर्ख़
लाली
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Anmol Mishra
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ऊँची
इमारतों
से
मकाँ
मेरा
घिर
गया
कुछ
लोग
मेरे
हिस्से
का
सूरज
भी
खा
गए
Javed Akhtar
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बदन
नुचवा
रहा
है
चींटियों
से
देख
लो
कैसे
तुम्हें
गाहे-बगाहे
जो
चिकोटी
काट
लेता
था
Atul K Rai
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चाँद
नहीं
शामिल
होता
उनकी
ज़िद
में
वक़्त
गिरा
देता
है
जिनके
छत
साहब
Atul K Rai
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न
जाने
चाँद
कब
लौटेगा
छत
पर
न
जाने
कब
हमारी
ईद
होगी
Atul K Rai
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ज़ुदा
हम
हो
गए
अफ़सोस
कैसा
फ़लक
धरती
से
कब
लिपटा
दिखा
है
Atul K Rai
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फूल
बिस्तर
पर
बिछाया
जा
चुका
है
एक
तकिए
की
कमी
बस
खल
रही
है
Atul K Rai
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