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Atul K Rai
na jaane chaand kab lautega chat parna jaane kab hamaari eed hogii
na jaane chaand kab lautega chat parna jaane kab hamaari eed hogii | न जाने चाँद कब लौटेगा छत पर
- Atul K Rai
न
जाने
चाँद
कब
लौटेगा
छत
पर
न
जाने
कब
हमारी
ईद
होगी
- Atul K Rai
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यूँँ
तो
तेरे
सँवरने
पर
कोई
बंदिश
नहीं
है
जाँ
मगर
उस
चाँद
की
तौहीन
करना
ठीक
थोड़ी
है
Harsh saxena
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उस
चाँद
को
भी
रश्क
होता
था
उसी
को
देख
कर
मैं
भी
खुले
आकाश
में
तस्वीर
उसकी
चूमता
Ankit Yadav
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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कि
जैसे
चाँद
निकलेगा
यहीं
से
मैं
ऐसे
एक
खिड़की
देखता
हूँ
Aks samastipuri
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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तरीक़े
और
भी
हैं
इस
तरह
परखा
नहीं
जाता
चराग़ों
को
हवा
के
सामने
रक्खा
नहीं
जाता
मोहब्बत
फ़ैसला
करती
है
पहले
चंद
लम्हों
में
जहाँ
पर
इश्क़
होता
है
वहाँ
सोचा
नहीं
जाता
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Abrar Kashif
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हम
पे
कर
ध्यान
अरे
चाँद
को
तकने
वाले
चाँद
के
पास
तो
मोहलत
है
सहर
होने
तक
Rehman Faris
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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एक
ग़ज़ल
को
पूरी
करने
की
ज़िद
में
जाने
कितने
शे'र
अधूरे
छूट
गए
Atul K Rai
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ख़बर
नहीं
है
आगे
क्या-क्या
होने
वाला
साथ
मेरे
अच्छे
ख़ासे
नाटक
का
कितना
घटिया
क़िरदार
हूँ
मैं
Atul K Rai
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जीत
हो
या
हो
हार
क्या
करना
फ़ालतू
का
प्रचार
क्या
करना
जब
प्रतिष्ठा
की
बात
आ
जाए
जंग
फिर
दरकिनार
क्या
करना
आख़िरी
तक
प्रयास
जारी
रख
बोल
मत
इंतिज़ार
क्या
करना
सोचना
ठीक
है
तुम्हारा
भी
सोचना
है
तो
प्यार
क्या
करना
प्रेम
अव्वल
है
मान
लेते
हैं
कौन
अव्वल
पे
रार
क्या
करना
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Atul K Rai
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अपनी
लाश
उठाओ
अपने
काँधे
पर
सरकारों
के
जिम्में
कुर्सी
छोड़ो
बस
Atul K Rai
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गिरो
तो
इतनी
ऊँचाई
से
गिरना
लगे
जैसे
हवा
में
उड़
रहे
हो
Atul K Rai
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