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Atul K Rai
rooh ghar par hi bhool aaya tha
rooh ghar par hi bhool aaya tha | रूह घर पर ही भूल आया था
- Atul K Rai
रूह
घर
पर
ही
भूल
आया
था
हम
निहत्थे
पे
वार
क्या
करते
- Atul K Rai
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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मुझ
सेे
वा'दा
करने
वाले
वा'दा
करके
भूल
गए
अच्छा
ख़ासा
पीतल
था
मैं
सोना
करके
भूल
गए
Tanoj Dadhich
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गुलाब
जैसे
होंठो
ने
छुआ
था
गालों
को
इसीलिए
न
भूल
पाया
बीते
सालों
को
Nirbhay Nishchhal
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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कुछ
इस
तरह
से
याद
आते
रहे
हो
कि
अब
भूल
जाने
को
जी
चाहता
है
Akhtar Shirani
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मैं
भूल
जाऊँ
तुम्हें
अब
यही
मुनासिब
है
मगर
भुलाना
भी
चाहूँ
तो
किस
तरह
भूलूँ
Javed Akhtar
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अब
तो
हर
बात
याद
रहती
है
ग़ालिबन
मैं
किसी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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जमाना
भूल
पायेगा
नहीं
अपनी
मुहब्बत
छपेंगे
क्लास
दसवीं
में
सभी
किस्से
हमारे
Shubham Seth
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दो
-चार
दिन
में
भूल
जायेगें
मिरे
अपने
मुझे
मैं
कोइ
होली,
दशहरा
हूँ
जो
मनाया
जाऊँगा
karan singh rajput
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उसके
पास
दवा
है
हर
बीमारी
की
वो
चाहे
तो
इक
पल
में
चंगा
कर
दे
कलियुग
को
भी
एक
कन्हैया
चहिए
जो
नंगा
करने
वालों
को
नंगा
कर
दे
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Atul K Rai
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आँसू
चाट
रहे
हैं
अब
की
तिश्ना-लब
हाँ
ये
बात
अलग
है
दरिया
दूर
नहीं
Atul K Rai
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ये
कैसी
कश्मकश
है
कैसे
किसे
बतायें
रोना
भी
आ
रहा
है
रो
भी
न
पा
रहा
हूँ
Atul K Rai
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दिया
बुझ
जाए
तो
अचरज
नहीं
है
हवा
का
रुख
बदलता
जा
रहा
है
Atul K Rai
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एक
झटके
में
हरा
देता
है
वो
डाँटने
पर
मुस्करा
देता
है
वो
तुम
अकेले
ही
नहीं
जो
मिट
गए
रोज़
लिखता
है
मिटा
देता
है
वो
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Atul K Rai
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