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Atul K Rai
dharm ke raaste pe chaliye dhairya rakhiye aur phir
dharm ke raaste pe chaliye dhairya rakhiye aur phir | धर्म के रस्ते पे चलिए धैर्य रखिए और फिर
- Atul K Rai
धर्म
के
रस्ते
पे
चलिए
धैर्य
रखिए
और
फिर
जीत
कर
लंका
अयोध्या
लौटिए
आराम
से
- Atul K Rai
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दिल
की
चोटों
ने
कभी
चैन
से
रहने
न
दिया
जब
चली
सर्द
हवा
मैं
ने
तुझे
याद
किया
Josh Malihabadi
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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सुकून
ए
क़ल्ब
होता
है
मुयस्सर
तेरा
जब
नाम
आता
है
लबों
पर
Kiran K
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सुकून
क़ल्ब
को
जिस
से
मिल
जाए
'ताबाँ'
ग़ज़ल
कोई
ऐसी
सुना
दीजिएगा
Anwar Taban
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अब
आ
भी
जाओ
के
सुकूंँ
मिले
मुझे
अगर
जो
जाना
था
तो
क्यूँँंँ
मिले
मुझे
ज़माना
हो
न
हो
रकी़ब
बीच
में
तू
अब
कभी
मिले
तो
यूँंँ
मिले
मुझे
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Faiz Ahmad
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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ये
मुझे
चैन
क्यूँँॅं
नहीं
पड़ता
एक
ही
शख़्स
था
जहान
में
क्या
Jaun Elia
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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पता
था
कुछ
न
कुछ
खो
कर
बनेगा
कहाँ
मालूम
था
जोकर
बनेगा
वही
पत्थर
जिसे
ठुकरा
दिए
सब
ख़ुशी
के
पाँव
का
ठोकर
बनेगा
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Atul K Rai
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सूरज
के
आते
ही
कैसे
छँटने
लगता
है
कोहरा
आ
जाओ
तुम
रस्ते
से
अवरोध
स्वयं
हट
जाएँगे
Atul K Rai
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कमरे
तक
पिज्जा
पहुंचाते
हैं
लड़के
तुमको
तो
बस
फ़ोन
घुमाना
होता
है!
Atul K Rai
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ये
कैसी
कश्मकश
है
कैसे
किसे
बतायें
रोना
भी
आ
रहा
है
रो
भी
न
पा
रहा
हूँ
Atul K Rai
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दिया
बुझ
जाए
तो
अचरज
नहीं
है
हवा
का
रुख
बदलता
जा
रहा
है
Atul K Rai
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