kabhi dimaagh kabhi dil kabhi nazar men raho | कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो

  - Rahat Indori
कभीदिमाग़कभीदिलकभीनज़रमेंरहो
येसबतुम्हारेहीघरहैंकिसीभीघरमेंरहो
जलालोकहींहमदर्दियोंमेंअपनावजूद
गलीमेंआगलगीहोतोअपनेघरमेंरहो
तुम्हेंपतायेचलेघरकीराहतेंक्याहैं
हमारीतरहअगरचारदिनसफ़रमेंरहो
हैअबयेहालकिदरदरभटकतेफिरतेहैं
ग़मोंसेमैंनेकहाथाकिमेरेघरमेंरहो
किसीकोज़ख़्मदिएहैंकिसीकोफूलदिए
बुरीहोचाहेभलीहोमगरख़बरमेंरहो
  - Rahat Indori
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy