charaaghon ko uchhaala ja raha hai | चराग़ों को उछाला जा रहा है

  - Rahat Indori
चराग़ोंकोउछालाजारहाहै
हवापररो'बडालाजारहाहै
हारअपनीअपनीजीतहोगी
मगरसिक्काउछालाजारहाहै
वोदेखोमय-कदेकेरास्तेमें
कोईअल्लाह-वालाजारहाहै
थेपहलेहीकईसाँपआस्तींमें
अबइकबिच्छूभीपालाजारहाहै
मिरेझूटेगिलासोंकीछकाकर
बहकतोंकोसँभालाजारहाहै
हमीबुनियादकापत्थरहैंलेकिन
हमेंघरसेनिकालाजारहाहै
जनाज़ेपरमिरेलिखदेनायारो
मोहब्बतकरनेवालाजारहाहै
  - Rahat Indori
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