sitaare | सितारे

  - Rafiq Sandelvi
सितारे
मुझेअपनाजल्वादिखा
वक़्तकेकिसख़लामें
मज़ाहिरकीकिसकहकशाँमें
ज़मानेकेकिसदुब्ब-ए-अकबरमें
तेराठिकानाहै
लाखोंबरससे
तुझेदेखनेकीतलबमें
जूँहीशामढलतीहै
मैंख़ुद-ब-ख़ुदखिंचताआताहूँ
इसग़ार-ए-शबमें!
अजबग़ारहै
एकबाज़ारहै
सैल-ए-लमआतका
आइनेनस्बहैं
रंगउड़तेहैं
शीशोंकेपीछे
चमकदारचीज़ोंकाअम्बारहै
रेशमींथानखुलतेहैं
एकएककरके
तहोंपरतहें
लगतीजातीहैं
मुक़य्यश,फ़रदारकपड़ोंकी
आँखोंमें
चोबीमुनक़्क़शछतोंसे
उमंडतीहुईरौशनी
झिलमिलातीहै
लहरोंकीसूरत
ज़रीझालरोंपर
मुतल्लालकीरोंपे
चाँदीकेपन्नोंपे
सिल्कीमहीनऔरघनेहाशियोंपर
सितारेदमकतेहैं
मव्वाजजालीसे
आवाज़आतीहै
देखेंजी
बाज़ारमेंइससेबढ़करमुरस्सा
कोईऔरकपड़ानहींहै
इसेजोभीपहनेगा
बिल्कुलसितारालगेगा
सितारेकेमानिंदचमकेगा
क्यामैंतुझेदेखपाऊँगा
इसलन-तरानीकेगुम्बदमें
मेरीसदागूँजतीहीरहेगी
जानेतुझेकिसकेमल्बूसपर
ख़्वाबकीनोक-ए-सोज़नसे
टाँकागयाहै!!
  - Rafiq Sandelvi
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