shareefon se rifaqat men to ghaflat ham nahin karte | शरीफ़ों से रिफ़ाक़त में तो ग़फ़लत हम नहीं करते

  - Rafeeq Anjum
शरीफ़ोंसेरिफ़ाक़तमेंतोग़फ़लतहमनहींकरते
किसीकम-ज़र्फ़सेमिलनेकीचाहतहमनहींकरते
किसीकीचापलूसीमेंजोदिनकोरातकहनाहै
कभीभूलेसेभीउसकीहिमायतहमनहींकरते
मोहज़्ज़बदौरमेंबेटोंकीबिक्रीख़ूबहोतीहै
कोईकहदेयेना-जाएज़तिजारतहमनहींकरते
हुसूल-ए-मंफ़अतअपनीनिगाहोंमेंमुक़द्दमहै
इन्हींवज्होंसेइज़हार-ए-हक़ीक़तहमनहींकरते
बनी-नौ-ए-बशरकीमंज़िलतशेवाहमाराहै
रिवायात-ए-बुज़ुर्गांसेबग़ावतहमनहींकरते
मुसलमाँहैंज़मानेकोपयाम-ए-अम्नदेतेहैं
जोदहशत-गर्दहैंउनकीवकालतहमनहींकरते
ग़लत-कारीकाजोअंजामहोनाथाहुआ'अंजुम'
मुक़द्दरकीख़राबीकीशिकायतहमनहींकरते
  - Rafeeq Anjum
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