manzil-e-yaar be-nishaan bhi nahin | मंज़िल-ए-यार बे-निशाँ भी नहीं

  - Raees Niyazi
मंज़िल-ए-यारबे-निशाँभीनहीं
दिलहोग़ाफ़िलतोराज़-दाँभीनहीं
बर्क़क्यूँँबे-क़रारहैइतना
अबतोगुलशनमेंआशियाँभीनहीं
होनज़रमेंअगरहक़ीक़त-ए-हुस्न
ज़िंदगीसादादास्ताँभीनहीं
वोजफ़ाओंपेशर्मसारहों
अबयेमंज़िलमुझेगराँभीनहीं
यारकीजुस्तुजूकोक्याकहिए
राएगाँभीहैराएगाँभीनहीं
दिलतकआएतोवजह-ए-तस्कींहो
वोनज़रइतनीमेहरबाँभीनहीं
अल्लाहअल्लाहसुरूर-ए-याद-ए-हबीब
अबमुझेहिज्रकागुमाँभीनहीं
लबतकजाएतोक़यामतहै
आशिक़ीकार-ए-बे-फ़ुग़ाँभीनहीं
अज़्मत-ए-हुस्नइश्क़सेहै'रईस'
सरनहींहैतोआस्ताँभीनहीं
  - Raees Niyazi
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