tumhaari zulf ke charche pareshaanon men rahte hain | तुम्हारी ज़ुल्फ़ के चर्चे परेशानों में रहते हैं

  - Radhe Shiyam Rastogi Ahqar
तुम्हारीज़ुल्फ़केचर्चेपरेशानोंमेंरहतेहैं
मिरीदीवानगीकेज़िक्रदीवानोंमेंरहतेहैं
नहींपरवा-ए-ईमाँकाफ़िरान-ए-इश्क़कोहरगिज़
उन्हेंकाबासक्यामतलबजोबुतख़ानोंमेंरहतेहैं
तलाशउसरश्क-ए-लैलाकीजोरहतीहैहमेंहर-दम
उसीसेक़ैसकेमानिंदवोवीरानोंमेंरहतेहैं
मियान-ए-महफ़िल-ए-अहबाबहैवोशम्अ'कीसूरत
हमउससेलौलगाएउसकेपरवानोंमेंरहतेहैं
फ़लकसेबढ़केरुत्बाहोक्यूँँकरक़स्र-ए-जानाँका
मलाएकजिसजगहअदनासेदरबानोंमेंरहतेहैं
अजबहैनेकसोहबतकीहोतासैरइंसाँमें
मोहज़्ज़बबनतेहैंहैवानजोइंसानोंमेंरहतेहैं
होमज़मूनआलीक्यूँँभलाअशआ'र'अहक़र'में
सुख़न-दानोंसेसोहबतहैज़बाँ-दानोंमेंरहतेहैं
  - Radhe Shiyam Rastogi Ahqar
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