shahar men ban ke mohabbat ka gadaagar maanguun | शहर में बन के मोहब्बत का गदागर माँगूँ

  - R P Shokh
शहरमेंबनकेमोहब्बतकागदागरमाँगूँ
मुझकोमाँगेसेमिलेवोतोमैंदरदरमाँगूँ
दहरकीदारपेझूलूँभीतोकैसेझूलूँ
ग़म-ए-दुनियाभीतिरेक़दकेबराबरमाँगूँ
इकतरफ़दिलकितिरेग़मसेउभरताहीनहीं
इकतरफ़मैंकितिरीदीदकागौहरमाँगूँ
तेरीयादोंकीउड़ानेंभीबहुतख़ूबमगर
दिलयेकहताहैतिरेलम्सकाशहपरमाँगूँ
ज़िंदगीमेरीहैकश्कोल-ए-तहीकीसूरत
उसभिकारीसेमैंमाँगूँभीतोक्याज़रमाँगूँ
एकपत्थरतिरीराहोंसेहटाहूँजबसे
आजयेहालकिहरपाँवसेठोकरमाँगूँ
  - R P Shokh
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