jab ek gul-ezaar ki sohbat men aa gaya | जब एक गुल-एज़ार की सोहबत में आ गया

  - R P Shokh
जबएकगुल-एज़ारकीसोहबतमेंगया
आरिज़कारंगमेरीतबीअतमेंगया
अपनीरज़ासेजिसनेमरासिमबढ़ाएथे
अर्ज़-ए-तलबपेवोभीनज़ाकतमेंगया
जीकेज़ररकोकौनउठाताहैआज-कल
इसदिलकोदाददेकिमोहब्बतमेंगया
फिरताहूँदहरमेंलिएयेदोस्तीकाहाथ
लगताहैमैंभीकू-ए-मलामतमेंगया
बे-दिलसेएककरकेवफ़ायूँँलगामुझे
येहाथइकमशीनकीख़िदमतमेंगया
  - R P Shokh
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