kyun joo-e-ravaan aa ke yuñ aankhoñ men kha | क्यूँँ जू-ए-रवाँ आ के यूँँ आँखों में खड़ी है

  - R P Shokh
क्यूँँजू-ए-रवाँकेयूँँआँखोंमेंखड़ीहै
लगताहैपहाड़ोंपेकहींबर्फ़पड़ीहै
दर्दकभीउठभीसहीतंगी-ए-दिलसे
मुद्दतसेदर-ए-दिलपेकोईयादखड़ीहै
मंज़िलकोचलेयाकिसीमक़्तलकोचलेहैं
हरराहयूँँलगतीहैकिज़ंजीरपड़ीहै
यूँँहीतोनहींबैठगएझाड़केदामन
महरूमी-ए-तक़दीरसेउम्मीदबड़ीहै
दोदिनकीमोहब्बतनेदीयेहस्ती-ए-जावेद
इकपलभीनहींकटतीअभीउम्रपड़ीहै
यूँँहमनेनिकालीहैतिरीराह-ए-मुलाक़ात
यूँँहिज्रतिरेदीदकीबरकतकीघड़ीहै
हरसुब्हतिरीचश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़काग़म्ज़ा
हरशामतिरेलबसेहँसीफूटपड़ीहै
दिनहैतोहैमहकातिरेरुख़्सारकाग़ाज़ा
शबहैतोतिरीमाँगसितारोंसेजड़ीहै
  - R P Shokh
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