kohkan-e-shab the raha shaghl sehar hone tak | कोहकन-ए-शब थे रहा शग़्ल सहर होने तक

  - R P Shokh
कोहकन-ए-शबथेरहाशग़्लसहरहोनेतक
सरपटकनाइसीदीवारमेंदरहोनेतक
उसकीआदतथीमिरेख़ूनकोपानीकरना
रंगक्याक्याउड़ाआँखकेतरहोनेतक
अबदवाहैदु'आहैमसीहागोया
हरख़ुदाईथीमिराख़ून-ए-जिगरहोनेतक
उम्रभरफिरसेजुदाईकोमोहब्बतकहना
देखनाभीहैज़मानेकीनज़रहोनेतक
अपनीआहेंहीसुबुक-गामहोनेदेंगी
पा-ब-ज़ंजीरचलोख़त्म-ए-सफ़रहोनेतक
शहरकाशहरहुआअबतोतआ'क़ुबमेंमिरे
तेराजादूभीथामुझख़ाक-बसरहोनेतक
येतोमैंथाकितराशाहैहरइकज़ख़्मसेफूल
हाथकटजातेहैंनाख़ुनमेंहुनरहोनेतक
  - R P Shokh
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