saans un ke mareez-e-hasrat ki ruk ruk ke chalti jaati hai | साँस उन के मरीज़-ए-हसरत की रुक रुक के चलती जाती है

  - Qamar Jalalvi
साँसउनकेमरीज़-ए-हसरतकीरुकरुककेचलतीजातीहै
मायूसनज़रहैदरकीतरफ़औरजाननिकलतीजातीहै
चेहरेसेसरकतीजातीहैज़ुल्फ़उनकीख़्वाबकेआलममें
वोहैंकिअभीतकहोशनहींऔरशबहैकिढलतीजातीहै
अल्लाहख़बरबिजलीकोहोगुलचींकीनिगाह-ए-बदपड़े
जिसशाख़पेतिनकेरक्खेहैंवोफूलती-फलतीजातीहै
आरिज़पेनुमायाँख़ालहुएफिरसब्ज़ा-ए-ख़तआग़ाज़हुआ
क़ुरआँतोहक़ीक़तमेंहैवहीतफ़्सीरबदलतीजातीहै
तौहीन-ए-मोहब्बतभीरहीवोजौर-ओ-सितमभीछूटगए
पहलेकीब-निसबतहुस्नकीअबहरबातबदलतीजातीहै
लाजअपनीमसीहानेरखलीमरनेदियाबीमारोंको
जोमौतटलनेवालीथीवोमौतभीटलतीजातीहै
हैबज़्म-ए-जहाँमेंना-मुम्किनबे-इश्क़सलामतहुस्नरहे
परवानेतोजलकरख़ाकहुएअबशम्अभीजलतीजातीहै
शिकवाभीअगरमैंकरताहूँतोजौर-ए-फ़लककाकरताहूँ
बे-वज्ह'क़मर'तारोंकीनज़रक्यूँँमुझसेबदलतीजातीहै
  - Qamar Jalalvi
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