lahd aur hashr men ye farq kam paa.e nahin jaate | लहद और हश्र में ये फ़र्क़ कम पाए नहीं जाते

  - Qamar Jalalvi
लहदऔरहश्रमेंयेफ़र्क़कमपाएनहींजाते
यहाँधूपनहींसकतीवहाँसाएनहींजाते
किसीमहफ़िलमेंभीऐसेचलनपाएनहींजाते
किबुलवाएहुएमेहमानउठवाएनहींजाते
ज़मींपरपाऊँरखनेदेउन्हेंनाज़-ए-यकताई
किअबनक़्श-ए-क़दमउनकेकहींपाएनहींजाते
तुझेदीदा-ए-तरफ़िक्रक्यूँँहैदिलकेज़ख़्मोंकी
किबे-शबनमकेभीयेफूलमुरझाएनहींजाते
जुनूँवालोंकोक्यासमझाओगेयेवोज़मानाहै
ख़िरदवालेख़िरदवालोंसेसमझाएनहींजाते
वक़ार-ए-इश्क़यूँँभीशम्अकीनज़रोंमेंकुछकमहै
पतिंगेख़ुदचलेआतेहैंबुलवाएनहींजाते
फ़ज़ीलतहैयेइंसाँकीवहाँतकजापहुँचताहै
फ़रिश्तेक्याफ़रिश्तोंकेजहाँसाएनहींजाते
बसइतनीबातपरछीनीगईहैरहबरीहमसे
किहमसेकारवाँमंज़िलपेलुटवाएनहींजाते
'क़मर'कीसुब्ह-ए-फ़ुर्क़तपूछिएसूरजकीकिरनोंसे
सितारेतोगवाहीकेलिएआएनहींजाते
  - Qamar Jalalvi
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