daanishwaron ke bas men ye radd-e-amal na tha | दानिशवरों के बस में ये रद्द-ए-अमल न था

  - Qaisar-ul-Jafri
दानिशवरोंकेबसमेंयेरद्द-ए-अमलथा
मैंऐसीतेग़लेकेउठाजिसमेंफलथा
क्यादर्दटूटटूटकेबरसाहैरातभर
इतनाग़ुबारतोमिरेचेहरेपेकलथा
पथरावकररहाहैवोख़ुदअपनीज़ातपर
क्यादिलकेमसअलेकाकोईऔरहलथा
शाख़ेंलदीहुईथींतोपत्थरथानसीब
पत्थरपड़ेमिलेतोदरख़्तोंमेंफलथा
शबकीहवासेहारगईमेरेदिलकीआग
यख़-बस्ताशहरमेंकोईरद्द-ओ-बदलथा
अबएकएकहर्फ़सेछनतीहैरौशनी
तुमसेमिलेथेतोयेहुस्न-ए-ग़ज़लथा
'क़ैसर'!ज़मीर-ए-वक़्तकोदेखाकुरेदके
सदियाँरखीथींदोशपेमुट्ठीमेंपलथा
  - Qaisar-ul-Jafri
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