vo ek khema-e-shab jis ka naam duniya tha | वो एक ख़ेमा-ए-शब जिस का नाम दुनिया था

  - Qaisar-ul-Jafri
वोएकख़ेमा-ए-शबजिसकानामदुनियाथा
कभीधुआँतोकभीचाँदनीसालगताथा
हमारीआगभीतापीहमेंबुझाभीदिया
जहाँपड़ावकियाथाअजीबसहराथा
हवामेंमेरीअनाभीगतीरहीवर्ना
मैंआशियानेमेंबरसातकाटसकताथा
जोआसमानभीटूटागिरामिरीछतपर
मिरेमकाँसेकिसीबद-दुआकारिश्ताथा
तुमगएहोख़ुदाकासुबूतहैयेभी
क़समख़ुदाकीअभीमैंनेतुमकोसोचाथा
ज़मींपेटूटकेकैसेगिराग़ुरूरउसका
अभीअभीतोउसेआसमाँपेदेखाथा
भँवरलपेटकेनीचेउतरगयाशायद
अभीवोशामसेपहलेनदीपेबैठाथा
मैंशाख़-ए-ज़र्दकेमातममेंरहगया'क़ैसर'
ख़िज़ाँकाज़हरशजरकीजड़ोंमेंफैलाथा
  - Qaisar-ul-Jafri
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