ubalte paaniyon men hooñ kahaan ubaal ki tarah | उबलते पानियों में हूँ कहाँ उबाल की तरह

  - Qaisar Shameem
उबलतेपानियोंमेंहूँकहाँउबालकीतरह
मैंआजभीहूँतह-नशींगुज़िश्तासालकीतरह
दिलोंमेंसबकेचुभरहीहैइकसवालकीतरह
तिरीनिगाह-ए-यासभीहैमेरेहालकीतरह
करूँँगातुझसेगुफ़्तुगूज़राठहरनिमटतोलूँ
खड़ाहैकोईबीचमेंअभीसवालकीतरह
पूछमुझसेहालदिलकिइनदिनोंहैज़िंदगी
किसीउरूज-ए-दीदाकीशब-ए-ज़वालकीतरह
वोएकयादजोअभीहैदाग़-ए-दिलबनीहुई
फिसलजाएज़ेहनसेकिसीख़यालकीतरह
पूछ'क़ैसर'-ए-हज़ींअजीबसीवोचीज़है
बिछीहुईहैशहरमेंजोएकजालकीतरह
  - Qaisar Shameem
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