sulag rahi hai zameen ya sipahr aankhoñ men | सुलग रही है ज़मीं या सिपहर आँखों में

  - Qaisar Shameem
सुलगरहीहैज़मींयासिपहरआँखोंमें
धुआँधुआँसाहैक्यूँँतेराशहरआँखोंमें
खुलेदरीचेकेबाहरहैकौनसामौसम
किआगभरनेलगीसर्दलहरआँखोंमें
कहाँहैनींदकिहमख़्वाबदेखेंअमृतका
जोशामगुज़रीहैउसकाहैज़हरआँखोंमें
ख़फ़ाहुएभीकिसीसेतोक्याकियाहमने
बहुतहुआतोरहादिलकाक़हरआँखोंमें
कोईउतारनेबैठेतोहाथजलजाए
खिंचीहैअबकेवोतस्वीर-ए-दहरआँखोंमें
वहीहैप्यासकामंज़रवहीलहू'क़ैसर'
हनूज़फिरतीहैकोनेकीनहरआँखोंमें
  - Qaisar Shameem
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